यादें ॰॰॰॰सुनहरी!



“मैडम आप को रिसीव करने हम आ रहे हैं।”

फ़ोन के उस पार एक मीठी सी मनुहार भरी आवाज़ सुनाई दी । भला कैसे कोई इसको भूल जाये । आज भी कानों में वही आवाज़ गूँज रही है, पर समय का फेर देखो दोबारा कैसे उन तक पहुँचा जाये । 


ओडिशा राज्य अपनी सांस्कृतिक धरोहर , फ़िलग्री वर्क, पर्यटन, भित्ति चित्रकारिता , श्री जगन्नाथ पुरी और सूती साड़ी के लिए प्रसिद्ध है । हम यानि की मेरी दीदी और भाभी के साथ चार  दिन की भुबनेश्वर की यात्रा की तैयारी कर वहाँ पहुँच गए । थोड़ा असमंजस भी था कि पहली बार हम तीनो बिना अपने पतियों के घूमने निकले हैं । इसका सारा बीड़ा मैं ने उठा रखा था । सोच रही थी क्या सब अच्छे से हो जाएगा । मन के वहम ने बहुत परेशान कर दिया। 

जैसे ही प्लेन लैंड किया फ़ोन को ऑन ही किया था कि घंटी बज गई । फिर वही मीठी आवाज़ “ हम सब आपका इंतज़ार कर रहे हैं ।” जान में जान आयी कि चलो कोई तो है अपना यहाँ । 

सुंदर सौम्य और प्यारे से मुस्कुराते चेहरे ने स्वागत किया । नाम ‘राजलक्ष्मी’ , नाम अनुसार व्यक्तित्व जैसे ईश्वर ने ख़ुद ही भेजा हो । पहले से ही सभी इंतज़ाम करे हुए थे । 

हर दिन मुस्कुराते हुए बिना थके हमारे साथ घूमने चलती थीं । महिलाओं का पहला शौक शॉपिंग होता है तो दीदी भाभी को सारी की शॉपिंग करते देख बोलीं क्या आप नहीं करेंगी? फिर आप ही बोलीं हम लोग तनख्वाह वाले इतनी महंगी सारी कैसे खरीद सकते हैं । वाकई ओडिशा की साड़ियां अपनी बेहतरीन हथकरघा (हैंडलूम) कला, पारंपरिक बंधा (इकत) बुनाई और सांस्कृतिक महत्व के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। पर उतनी ही दामदार हैं क्योंकि इसको बनाने में समय और कलाकारी दोनों अत्यधिक है । 


एक दिन सूर्य मंदिर जाने का प्लान बना । जाना तो केवल 6 लोगों को था पर हमारी संस्था की सभी महिलाएँ जाने की इक्षुक दिखीं । हमने कहा भी आप सब अपने परिवार के साथ समय बितायें पर सभी बोली यह तो हम रोज़ करते हैं आपका साथ रोज़ रोज़ कहाँ मिलेगा । राजलक्ष्मी जी परिवार की मुखिया के तरह सबको साथ ले कर चलने की तैयारी करी। मैं अभिभूत थी वहाँ की गर्मजोशी , प्यार और अपनापन देख कर । चोरी चोरी सुख के आँसू पोछ लेती थी । कहाँ मिलेगी ऐसी आत्मीयता । 


पुरी के समुद्र की उछलती लहरें मन के तारों को संगीत की ऐसे तान छेड़ रही थीं कि बचपन फिर याद आ गया । एक साथ पंद्रह जोड़ी हाथों ने एक दूसरे को थाम कर मानो डूबते सूरज को अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लिया । उच्चश्रंखल लहरों को काबू करना तो इनसे ही सीखना पड़ेगा, ऐसा लगा । तीस मिनट में हमने तीस घंटों की खुशियाँ इकट्ठी कर लीं । बालू में लथपथ गीले कपड़ों में एक साथ परिवार सरीखा सुख बटोर लिया । 


श्री जगन्नाथ जी , डॉलफिन का नृत्य , झील की सैर सब कुछ ना भूलने वाले पलों को दिल के कोनों में दबाये वापस घर लौट चले । कितनी भी थकान हो पर राजलक्ष्मी जी की शांत मुस्कुराहट हर प्रॉब्लम का हल ढूँढ लेती थी । शॉपिंग के बाद थके माँदे एक दिन जब गेस्ट हाउस पहुँचे तो देखा एक सारी का लिफ़ाफ़ा गायब है । गलती हमारी ही थी पर उनके पेशेंस की दाद देनी पड़ेगी , सब सुना और थोड़ी में सारी का पैकेट ढूँढ निकाला । 


किसी ने बताया वह नहीं रहीं , पहले तो विश्वास नहीं हुआ फिर धक से दिल बैठ गया साथ ही मानने को मन नहीं किया । सच सुना है ईश्वर को भी अच्छे लोगों की ज़रूरत होती है । असमय निधन पर कोई भी विश्वास नहीं कर पा रहा था । फिर वही चिरपरिचित मुस्कुराती हुई तस्वीर आँखों के सामने उभर आयी । श्रद्धांजलि सभा में उदास चेहरे , घर में काम करने वाले सहायक और गार्ड सभी की आँखों में आँसू , मेरी भी आँखों में आँसू …बहुत मनुहार से रथयात्रा पर पूरी का न्योता दिया था , सोचा था सब कामों से फ़ारिग़ हो जाएँ तो करेंगे ………… पर उनके बिना वह अधूरी ही है और रहेगी । 

हमारा ध्रुव तारा आज आकाश में चमक रहा है । शी इस ए प्युरेस्ट सोल , नो डाउट । 

आपकी याद में 

मंजरी  💖🌼

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